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लैलतुल क़द्र (शब-ए-क़द्र) क्या है?

क़ुरआन लैलतुल क़द्र को हज़ार महीनों से बेहतर बताता है। यहाँ इस बरकत वाली रात का अर्थ, इसे कब खोजा जाता है, और मुसलमान इसे कैसे बिताते हैं।

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तहज्जुद समय कैलकुलेटर — क़ुरआन लैलतुल क़द्र को हज़ार महीनों से बेहतर बताता है। यहाँ इस बरकत वाली रात का अर्थ, इसे कब खोजा जाता है, और मुसलमान इसे कैसे बिताते हैं।

यह क्या है?

लैलतुल क़द्र — क़द्र या शक्ति की रात — वह रात है जब क़ुरआन का अवतरण आरंभ हुआ। क़ुरआन कहता है यह "हज़ार महीनों से बेहतर" है, इसलिए इस एक रात की इबादत का प्रतिफल अत्यधिक है।

यह कब है?

यह रमज़ान की अंतिम दस रातों में आती है, और विषम रातों पर सर्वाधिक ज़ोर है — 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं। इसकी ठीक रात छिपी हुई है, जिससे मुसलमान अंतिम दस रातों में इसे खोजें।

इसे कैसे मनाया जाता है

मुसलमान यह रात नमाज़ (विशेषकर तहज्जुद), क़ुरआन की तिलावत, दुआ और इस्तिग़फ़ार में बिताते हैं। एक प्रसिद्ध दुआ अल्लाह से माफ़ी माँगती है, क्योंकि अल्लाह माफ़ करना पसंद करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह रमज़ान की सबसे पवित्र रात है, क़द्र की रात, जिसे क़ुरआन हज़ार महीनों से बेहतर बताता है, और इसी रात क़ुरआन का अवतरण आरंभ हुआ।

इसे रमज़ान की अंतिम दस रातों में खोजा जाता है, विशेषकर विषम रातों (21, 23, 25, 27, 29) में; इसकी ठीक रात निश्चित नहीं।

इसे नमाज़, क़ुरआन की तिलावत और दुआ में बिताएँ, विशेषकर रात के अंतिम तिहाई में।

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